हार्ट बीट अपने आप में एक ऐसा मापदंड है जो हमारी शारीरिक क्षमता व दिल की सेहत बयान करता है| आम तौर पे मनुष्य की धड़कन की गिनती 80 धड़कन प्रति मिनिट्स है | यह गिनती 62 से लेकर 90 प्रति मिनिट्स तक भी सामान्य हो सकती है| जब हम कोई शारीरिक हरकत करते है तो हमारे दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है | अगर हम जयादा जोर से व्यायाम करें तो धड़कन जयादा तेज़ हो जाती है और अगर हम धीरे व्यायाम करें तो धड़कन भी धीरे से बढ़ती है | जैसे की 100 मीटर रेस दौड़ते समय धड़कन और सांस बहुत तेज़ हो जाती है यहाँ तक की 160 से 200 के ऊपर भी पहुंच जाती है | परन्तु अगर कोई बोले की एकबार एकदम से दोबारा 100 मीटर्स दौड़े तो आप नहीं दौड़ सकेगें क्योंकि आप की दिल की धड़कन व सांस की क्रिया आप के बस के बहार हो चुकी होती है और आप को पर्याप्त आराम चाहिए ताकि आप ठीक महसूस करें और दोबारा पूरी ताकत से दौड़ सके |

इसी प्रकार जिम में सेट लगाते समय वजन और रेपिटिशन के आधार से हम जोर व ताकत लगाते है और सेट के एकदम बाद जब हम धड़कन गिने तो वह 150 से 170 तक चली जाती है| सेट के बाद हमें दोबारा उसी ताकत से सेट लगाने की लिए 4-6 मिनट्स का आराम जरूर चाहिए | अगर हम कम समय का आराम करेंगे तो हम पूरे जोर से सेट नहीं लगा सकेगे | अगर आपको ताकत चाहिए तो 2-3 रेप्स लगाये और 6-7 मिनट्स का आराम करें और अगर आप को मॉस या साइज चाहिए तो आपको 6-10 रेप्स लगाने चाहिए और 4-6 मिनिट्स का आराम आवशयक है और अगर आप को फिटनेस चाहिए तो 15-20 रेप्स लगाने चाहिए और 30 सेकंड से 1.5 मिनट्स का आराम आवशयक है |

ये सारी सेट्स, आराम, वजन,रेपिटिशन और साँस तथा हार्ट बीट का अपने आप में पूरा विज्ञानं है जिनका तालमेल अतिआवश्यक है नहीं तो ना ही ताकत, मॉस, साइज बढ़ेगा न ही कोई फिटनेस होगी और साथ में कोई न कोई चोट लगेगी या न चाहते हुए भी व्यायाम छूट जाएगा |