जिम में जाना अपने आप में एक दिनचर्या का हिस्सा है और शरीर की अपेक्षित जरूरत के लिए हमे जिम जाने का लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है |
ताकि हमे यह पता हो कि हम जिम क्यों जा रहे हैं और हम वहाँ पर क्या और कैसे करेंगे ताकि हम अपनी शारीरिक क्षमता को निरंतर बढ़ाते जाएं | आमतौर पर हम ऐसे लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं जो कि हम प्राप्त नहीं कर सकते या हमारी क्षमता से परे हैं | छोटे-छोटे और अपनी क्षमता के अनुसार प्राप्त करने वाले लक्ष्य ही निर्धारित करने चाहिए ताकि हम अपनी निरंतर बढ़ने वाली ताकत व मांसपेशियों कि कार्यकुशलता से वो लक्ष्य
हासिल करते जाएं |

अगर हम बड़े लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं और हर बार वो लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते तो धीरे-धीरे हम वो छोटे से लक्ष्य प्राप्त न करने वाली हार से विचलित हो जाएंगे और हमारा व्यायाम के प्रति मोह भंग हो जाएगा | जिससे हम अपनी लक्ष्य से कई दूर हो जाएंगे |
उदाहरण के तौर पर अगर हम बैंच प्रैस में ७० किलोग्राम के २-३ सैट लगाते हैं और उनमें ६-८ रैपीटीशन लगा पाते हैं तो हमारा निर्धारित लक्ष्य उसी भार को ८-१० रैपीटीशन लगाने वाला होना चाहिए न कि सीधा १०० किलोग्राम उठाने का लक्ष्य रखना चाहिए | अगर हम अगले बैंच प्रैस का सैशन जो कि कुछ दिनों बाद आता हैं और हम अपने पहले से उठाए जाने वाले भार के सैट्स मे रैपीटीशन की बढ़ौतरी कर पाते हैं तो समझिए हमने अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया हैं और अगर हम यह लक्ष्य कई बार कोशिश करने कि बावजूद भी नही कर पाते तो समझिए या तो आप लक्ष्य कि प्रति दिल से एकाग्रित नही हैं या आप जरूरत से ज्यादा ओवर ट्रेनिंग कर रहे हैं या जरूरत से कम या ज्यादा आराम कर रहे हैं |


यह सब तभी पता चल सकता हैं अगर हम अपने पास एक ट्रेनिंग नोट बुक रखे जिसमे हम अपने अपने प्राप्त किये गए सतर को पूरी तरह रिकॉर्ड रखें और हर रैपिटीशन के बाद अगले रैपिटीशन को पूरा करने की इंटैंसिटी के बारे मे अंकित करे ताकि अगली बार जब उसी व्यायाम को और ज्यादा ताकत से करे, ताकि पिछली बार किए गए वो अंकित असफल रैपिटीशन को और जोर से किया जा सके |

यह सब तभी हो सकेगा जब हम अपने आप को पूरी तरह से वो लक्ष्य हासिल करने कि लिए एक दिन पहले से ही तैयारी करें और पूरी तरह मनोवैज्ञानिक तौर से तैयार रहें ताकि अपनी ट्रेनिंग नोट बुक में अंकित असफल रैपिटिशनो को पूरी तरह एकाग्रित क्षमता से पूरा करते हुए एक छोटी विजय हासिल कर सकें| यह छोटी-छोटी विजय अगर हम लगातार अजिर्त करने जाएं तो कोई मुश्किल नही हैं कि हम उसी ७० किलोग्राम के ७-८ लगाने में कामयाब हो जाएं और इस तरह शारीरक क्षमता को निरंतर बढ़ाते हुए अपनी ताकत में बढ़ोत्तरी करते जाएंगे , जिसके फलस्वरूप हमारी मांसपेशियां आकार में बड़ी व मजबूत होती जाएंगी और वो दिन दूर नही होगा जब आने वाली कुछ महीनों या सालों में १२० किलोग्राम या उससे भी ज्यादा वज़न के ७-८ रैपिटीशन लगाने लग जाएंगे और आपका शरीरक अनुपात एक चैंपियन की तरह बनता जाएगा |