Metabolism यानि चयापचय क्रिया और यह वो क्रिया है जिसमे हम शामिल करते है जिन्दा रहने के लिए आवश्यक शरीर में होने वाली वो तमाम रासायनिक अभिक्रियाएँ जो हम जीवो में कोशिकाओं को उर्जा प्रदान करने के लिए होती है वो मेटाबोलिज्म में आती है और उसे दो भागो में विभाजित किया जा सकता है और वो है अपचय और उपचय| अगर आपका मेटाबोलिज्म हाई है तो आप ज्यादा कैलोरीज बर्न करते है | मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर का एनर्जी प्रोवाइडर होता है, जो शरीर के सेल्स को बनने में मदद करता है। यह एक ऐसा प्रोसेस भी माना जाता है जो आपके भोजन को एनर्जी, एंजाइम और फैट में तबदील कर देता है।बता दें कि आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया पूरे 24 घंटे चलती रहती है। वहीं, अगर यह प्रकिया गलती से भी रुक गई तो आपकी शरीर की तमाम क्रियाएं ठहर सकती हैं। ‘हाई मेटाबॉलिज्म’ और ‘स्लोत मेटाबॉलिज्म’ दोनों ही प्रकार हमारी सेहत को प्रभावित करने का काम करते हैं, इसलिए इसका संतुलित में रहना बेहद जरूरी होता है। मेटाबॉलिज्म का धीमा या तेज होना मेटाबॉलिक रेट निर्धारित करती है, जिसे बेसल मेटाबॉलिक रेट (बीएमआर) भी कहते हैं |

स्लो मेटाबॉलिज्म जब आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म का प्रोसेस (प्रकिया) बहुत धीमी हो जाती है, तो आपका शरीर सुस्त सा हो जाता है। मेटाबॉलिज्म कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें हाइपोथेडिज्म, कुपोषण, असंतुलित भोजन, व्यायाम न करना और एंट्री डिप्रेशन दवाओं का इस्तेमाल सबसे प्रमुख हैं। ऐसे में इंसान को ट्यूमर, ब्रेन टयूमर, एडलीन (शरीर में पानी का भर जाना) और दिल संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

हाई मेटाबॉलिज्म आपका मेटाबॉलिज्म हाई हुआ तो आपका शरीर गर्म रहने लगेगा और साथ ही दिल की धड़कनें भी तेज होने लगेगी। जान लें कि ऐसी परिस्थिति में भूख ज्यादा लगती है और बुखार के लक्षण भी उभर सकते हैं।वहीं, हाई मेटाबॉलिज्म के कारणों की बात करें, तो इसमें ब्रेन हार्मोन एवं थायराइड हार्मोन का बढ़ना, दवाओं का असर, किडनी की ग्लेंड्स का बढ़ना जिम्मेदार हो सकता है। अगर आपका मेटाबॉलिज्म तेज़ है, तो आपके लिए प्रोटीन शेक और प्रोटीनयुक्त भोजन वजन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

कैसे ठीक रखें मेटाबॉलिज्म ध्यान रहे कि मेटाबॉलिज्म को सही रखना है तो अपने खानपान का सही करना होगा, क्योंकि मेटाबॉलिज्म काफी हद तक हमारे खानपान और शारीरिक गतिविधियों पर भी निर्भर करता है। गलत खानपान या फिर लंबे समय तक कुछ भी न खाने से इसकी समस्या हो सकती है। अब अगर आपका लक्ष्य फैट घटाना है तो आपको डाइटमें कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन कम लेना चाहिए और अगर आप मसल्स बनाना चाहते हैं तो प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में लें.आपके सोने का रुटीन, तनाव का स्तर आदि बी मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता हैइसलिए डाइट के साथ-साथ कसरत भी जरूरी है| जिनका मेटाबॉलिज्म धीमा है उनका संघर्ष कभी नहीं कम होता है इसलिए दूसरों से अपनी तुलना छोड़िए, सेहतमंद खाएं | फिट रहें और हेल्थ चेकअप करवाते रहें |